Paryushan Mahaparv – Samvatsari

Paryushana is one of the most important annual holy event for the Jain community. It is a time when people increase their level of spiritual intensity, often using fasting and prayer/meditation to help.
The last day of the Paryushana Mahaparv is popularly known as Samvatsari. At the end, followers request forgiveness or क्षमा-याचना to others for any offenses committed during the last year.
Forgiveness is asked by saying Micchami Dukkadam !!मिच्छामी दुक्कडम् !!

महापर्व पर्युषण धरमार्धना का पर्व है।
आत्मावलोकन कराता सर्वस्व है।
आत्मा से आत्मा को देखो – “संपिक्खए अप्पगमप्पएणं”
आत्म चिंतन, आत्म साधना, आत्म मंथन और आत्म रमण।
उपर्युक्त को प्राप्त करने के हैं कई साधन –
शुद्ध आहार, शुद्ध विचार।
कम खाओ, गम खाओ।
सावध चर्या का त्याग।
स्वाध्याय से अनुराग।
लघु नियम, छोटे संकल्प।
शुद्ध मन से जप तप।
अंतर्मन से ध्यान लगाना।
और अंत में शुद्ध मन से क्षमापना।
आठ दिनों की ये जीवन – चर्या,
यदि बन जाए हमारी दैनिक क्रिया,
कलह – कषाय, रोग – शोक, दुःख – दर्द, जैसे अवयव गौण हो जाएं।
आत्म – जागृति, जीवन – उन्नति के पथ पर हम आगे बढ़ पाएं।
“संपिक्खए अप्पगमप्पएणं” जीने का सूत्र बन जाए,
इस महापर्व का महान उद्येश्य सफल सात्विक रूप पाए।

मन वचन काया से बारम्बार खमतखामना🙏🙏

 

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